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भारत के मिसाइल सिस्टम एवं रक्षा प्रौद्योगिकी

1 min read 59 views 06 Jul 2026 General Science
भारत के संपूर्ण मिसाइल कार्यक्रम, एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP), अग्नि (अग्नि-V व प्राइम), पृथ्वी, ब्रह्मोस, अस्त्र और आकाश मिसाइल प्रणालियों का नवीनतम मारक क्षमता एवं तकनीकी सांख्यिकी डेटा सहित विस्तृत नोट्स।
Key Points
  • अग्नि मिसाइल शृंखला भारत की रणनीतिक परमाणु क्षमता का आधार है, जिसमें अग्नि-V की रेंज 5000-8000 किमी है
  • पृथ्वी मिसाइल भारत की पहली स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल है जो तीनों सेनाओं द्वारा उपयोग की जाती है
  • ब्रह्मोस विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो मैक 2.8-3.0 की गति से उड़ती है
  • अस्त्र भारत की पहली स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है जिसकी रेंज 44-160 किमी है
  • आकाश एक बहुउद्देश्यीय सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम है जो विमान और मिसाइल दोनों को रोक सकता है
  • एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) की शुरुआत वर्ष 1983 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में हुई थी, जिसके तहत पांच मिसाइल प्रणालियों का विकास किया गया।
  • अग्नि-V भारत की पहली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसकी मारक क्षमता 5000 से 8000 किमी से अधिक है और यह हाल ही में MIRV (दिव्यास्त्र) तकनीक से सुसज्जित की गई है।
  • पृथ्वी मिसाइल शृंखला भारत की पहली स्वदेशी तरल ईंधन आधारित बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है, जिसका नौसैनिक संस्करण 'धनुष' के नाम से जाना जाता है।
  • ब्रह्मोस भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम है, यह मैक 2.8 की गति वाली विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसकी विस्तारित रेंज अब 400+ किलोमीटर से अधिक है।
  • अस्त्र मिसाइल भारत की पहली स्वदेशी हवा-से-हवा में मार करने वाली बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVRAAM) मिसाइल प्रणाली है, जिसकी गति मैक 4.5 तक है।
  • आकाश मिसाइल रक्षा प्रणाली सतह-से-हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की स्वदेशी प्रणाली है, जिसके नवीनतम संस्करण 'आकाश-NG' की मारक क्षमता 70-80 किमी तक विस्तारित की गई है।
  • भारत ने 'मिशन शक्ति' के तहत एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल तकनीक का सफल परीक्षण कर अंतरिक्ष में रक्षात्मक संप्रभुता हासिल की है।

भारत के मिसाइल सिस्टम का परिचय

भारत का सुनियोजित मिसाइल कार्यक्रम आधिकारिक तौर पर वर्ष 1983 में एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) के रूप में प्रारंभ हुआ था। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की परिकल्पना और नेतृत्व रक्षा वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया था, जिन्होंने भारत को मिसाइल प्रौद्योगिकी में पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाया। IGMDP के तहत पांच मुख्य मिसाइल प्रणालियों (पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश और नाग) के विकास की नींव रखी गई, जिसे वर्ष 2008 में सफलतापूर्वक पूर्ण घोषित किया गया। वर्तमान परिदृश्य में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा भारतीय मिसाइल सिस्टम को उनकी परिचालन प्रकृति, प्रक्षेपवक्र (Trajectory) और मारक क्षमता के आधार पर मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

अग्नि मिसाइल शृंखला (Agni Missile Series)

अग्नि मिसाइल शृंखला भारत की सामरिक रक्षा और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) की रीढ़ है। यह भारत के रणनीतिक परमाणु त्रिभुज (Strategic Nuclear Triad) का सबसे महत्वपूर्ण भूमि-आधारित घटक है, जो परमाणु हथियारों को ले जाने में पूर्णतः सक्षम है। वर्तमान में इस शृंखला में पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ आधुनिक कैनिस्टराइज्ड (Canister-based) तकनीक को शामिल किया गया है।

अग्नि मिसाइल की विभिन्न श्रेणियां एवं मारक क्षमता:

  • अग्नि-I: यह कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है, जिसकी मारक क्षमता 700 से 900 किलोमीटर है। यह ठोस ईंधन आधारित एकल चरणीय मिसाइल है, जो 1000 किलोग्राम तक का परमाणु पेलोड ले जा सकती है।
  • अग्नि-II: यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है। इसकी रेंज 2000 से 3000 किलोमीटर है। यह दो चरणीय ठोस प्रणोदक इंजन से युक्त है और इसे विशेष मोबाइल रेलवे/रोड लॉन्चर से दागा जा सकता है।
  • अग्नि-III: मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM), जिसकी मारक क्षमता 3000 से 5000 किलोमीटर तक है। यह अत्यधिक उच्च तापमान प्रतिरोधी थर्मल शील्ड से सुसज्जित है।
  • अग्नि-IV: यह अत्याधुनिक तकनीकों (जैसे रिंग लेजर जाइरो आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) से युक्त मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 4000 किलोमीटर है। यह रोड मोबाइल सिस्टम द्वारा त्वरित परिचालन के लिए उपयुक्त है।
  • अग्नि-V (ICBM): यह भारत की पहली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (Intercontinental Ballistic Missile) है। इसकी आधिकारिक मारक क्षमता 5000 से 8000 किलोमीटर से अधिक है, जो संपूर्ण एशिया और यूरोप के हिस्सों को कवर करती है। हाल ही में इसे MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक यानी 'दिव्यास्त्र' मिशन के तहत अपग्रेड किया गया है, जिससे यह एक साथ कई परमाणु हथियार अलग-अलग लक्ष्यों पर दाग सकती है।
  • अग्नि-प्राइम (Agni-P): यह अग्नि शृंखला की नई पीढ़ी की दो चरणीय कैनिस्टराइज्ड मिसाइल है, जिसकी रेंज 1000 से 2000 किलोमीटर है। कैनिस्टर आधारित होने के कारण इसे बहुत कम समय में कहीं भी ले जाया और दागा जा सकता है।

पृथ्वी मिसाइल शृंखला (Prithvi Missile Series)

पृथ्वी मिसाइल भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित सतह-से-सतह पर मार करने वाली कम दूरी की सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है। इसमें तरल प्रणोदक (Liquid Propulsion) इंजन का उपयोग किया जाता है और यह सेना के तीनों अंगों के लिए अलग-अलग वेरिएंट्स में कार्यरत है।

पृथ्वी मिसाइल के प्रमुख प्रकार:

  • पृथ्वी-I (SS-150): भारतीय थल सेना (Indian Army) के उपयोग हेतु निर्मित। इसकी मारक क्षमता 150 किलोमीटर है तथा यह 1000 किलोग्राम तक का पारंपरिक या परमाणु पेलोड ले जाने में सक्षम है।
  • पृथ्वी-II (SS-250): भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) के लिए विकसित। वर्तमान में इसकी परिचालन रेंज को बढ़ाकर 250 से 350 किलोमीटर किया गया है। यह उच्च परिशुद्धता के साथ जड़त्वीय नौवहन प्रणाली से संचालित होती है।
  • पृथ्वी-III (SS-350): भारतीय नौसेना के तटीय और जहाजी हमलों के लिए विकसित। इसकी रेंज 350 किलोमीटर है और इसकी मारक क्षमता को उन्नत प्रणोदकों से सुधारा गया है।
  • धनुष (Dhanush): यह पृथ्वी-III मिसाइल का विशेष नौसैनिक रूपांतरण (Naval Version) है। इसे विशेष रूप से डिजाइन किए गए नौसैनिक युद्धपोतों और जहाजों के डेक से दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile)

ब्रह्मोस (BrahMos) भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तथा रूस के 'एनपीओ मैशिनोस्ट्रोयेनिया' के मध्य एक संयुक्त उपक्रम के तहत विकसित की गई विश्व की सबसे मारक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (Supersonic Cruise Missile) है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। यह 'दागो और भूल जाओ' (Fire and Forget) के सिद्धांत पर कार्य करती है।

ब्रह्मोस की तकनीकी विशेषताएं:

  • गति (Speed): मैक 2.8 से 3.0 (अर्थात ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज)। यह दुनिया की सबसे तेज परिचालन वाली क्रूज मिसाइल है।
  • रेंज (Range): भारत के MTCR (Missile Technology Control Regime) में शामिल होने के बाद इसकी मारक क्षमता को प्रारंभिक 290 किमी से बढ़ाकर 400 से 500 किलोमीटर से अधिक (Extended Range) कर दिया गया है।
  • प्रणोदक प्रणाली: यह दो चरणीय मिसाइल है, जिसमें प्रथम चरण में ठोस बूस्टर इंजन और द्वितीय चरण में तरल रैमजेट (Ramjet) इंजन कार्य करता है।

ब्रह्मोस के विभिन्न वेरिएंट्स:

  • भूमि आधारित वेरिएंट: मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर द्वारा संचालित सतह-से-सतह पर मार करने वाला संस्करण।
  • नेवल वेरिएंट (Naval Version): युद्धपोतों और स्टील्थ डेस्ट्रॉयर्स से लंबवत (Vertical) लॉन्चिंग प्रणाली द्वारा दागे जाने वाला संस्करण।
  • एयर-लॉन्च्ड ब्रह्मोस (BrahMos-A): इसे भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धक विमान सुखोई-30 MKI (Su-30 MKI) से दागने के लिए विशेष रूप से मॉडिफाई किया गया है।
  • ब्रह्मोस-NG (Next Generation) व ब्रह्मोस-II: विकासाधीन वेरिएंट्स; ब्रह्मोस-II एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल होगी जो मैक 7 से अधिक की गति प्राप्त करने में सक्षम होगी।

अस्त्र मिसाइल (Astra Missile)

अस्त्र (Astra) भारत की पहली स्वदेशी रूप से निर्मित हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (Air-to-Air Missile) है। यह अत्याधुनिक बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVRAAM) श्रेणी के अंतर्गत आती है, जो पायलट की दृश्य सीमा से परे स्थित दुश्मन के लड़ाकू विमानों को अत्यधिक सटीकता से नष्ट कर सकती है।

अस्त्र मिसाइल की तकनीकी विशेषताएं:

  • गति: मैक 4.5 से अधिक (अत्यधिक तीव्र सुपरसोनिक गति)।
  • गाइडेंस सिस्टम: इसमें टर्मिनल फेज के लिए स्वदेशी सक्रिय रडार होमिंग (Active Radar Homing) सीकर प्रणाली लगी है।
  • लॉन्च प्लेटफॉर्म: इसे सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस (LCA Tejas) के साथ एकीकृत किया गया है।

अस्त्र मिसाइल के उन्नत संस्करण (Variants):

  • अस्त्र Mk-1: 110 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ पूर्णतः भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल।
  • अस्त्र Mk-2: विकासाधीन और परीक्षण के दौर में, जिसकी मारक क्षमता 160 किलोमीटर तक विस्तारित की गई है, इसमें डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर तकनीक प्रयुक्त है।
  • अस्त्र Mk-3: भविष्य की सामरिक योजना, जिसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का उपयोग कर 350+ किलोमीटर की रेंज प्राप्त करने का लक्ष्य है।

आकाश मिसाइल सिस्टम (Akash Missile System)

आकाश भारत की स्वदेशी तकनीक से निर्मित सतह-से-हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल रक्षा प्रणाली (SAM) है। यह एक साथ कई लक्ष्यों (जैसे दुश्मन के लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइलें, ड्रोन और हेलीकॉप्टर) को ट्रैक करके हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है। भारत ने हाल ही में इसका मित्र देशों को निर्यात भी प्रारंभ किया है।

आकाश मिसाइल शृंखला की तकनीकी तुलना:

तकनीकी विशेषता आकाश Mk1 आकाश Prime / Mk1S आकाश-NG (Next Generation)
अधिकतम मारक सीमा (Range) 25 किलोमीटर 30 से 35 किलोमीटर 70 से 80+ किलोमीटर
प्रभावी ऊँचाई (Altitude) 18 किलोमीटर 20 किलोमीटर 25+ किलोमीटर
अधिकतम गति (Speed) मैक 2.5 मैक 2.5+ मैक 3.5 से 4.0
सीकर एवं गाइडेंस सिस्टम कमांड गाइडेंस एवं ग्राउंड रडार इनपुट स्वदेशी सक्रिय रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सीकर युक्त सक्रिय इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार और आरएफ सीकर
प्रोपल्शन (ईंधन प्रणाली) ठोस बूस्टर और रैमजेट इंजन सॉलिड रैमजेट प्रोपल्शन दो चरणीय पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर (हल्का और तीव्र)

आकाश मिसाइल रक्षा प्रणाली के मुख्य घटक:

  • राजेंद्र रडार (Rajendra Radar): यह एक मल्टी-फंक्शन फेज़्ड एरे रडार है जो आकाश प्रणाली की मुख्य आँख है। यह एक साथ 64 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। (आकाश-NG में इसके स्थान पर उन्नत 'उत्तम' या 'फ्लैंक्स' रडार वेरिएंट शामिल किए जा रहे हैं)।
  • लॉन्चर और कमांड पोस्ट: मोबाइल लॉन्चर (TATRA ट्रकों या भीष्म टैंक चेसिस पर निर्मित) और ग्रुप कंट्रोल सेंटर (GCC) जो पूरी प्रणाली को स्वचालित कमान प्रदान करते हैं।

भारतीय रक्षा व मिसाइल कार्यक्रम की नवीनतम उपलब्धियां

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाल के वर्षों में केवल पारंपरिक मिसाइलों तक सीमित न रहकर वैश्विक सामरिक शक्ति संतुलन को भारत के पक्ष में करने के लिए कई अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का सफल परीक्षण और एकीकरण किया है:

  • मिशन शक्ति - एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल: भारत ने कम पृथ्वी की कक्षा (LEO) में स्थित एक लाइव सैटेलाइट को काइनेटिक किल तकनीक द्वारा मार गिराकर अंतरिक्ष मलबे या अंतरिक्ष युद्ध के दौर में खुद को विश्व की चौथी महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है।
  • बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रोग्राम: भारत ने द्वि-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कवच विकसित किया है। इसमें पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर मिसाइलों को नष्ट करने के लिए 'अश्विन' (Advanced Air Defence - AAD) इंटरसेप्टर और वायुमंडल के बाहर नष्ट करने के लिए 'प्रद्युम्न' (Prithvi Air Defence - PAD) तथा नैट (AD-1 व AD-2) मिसाइल डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।
  • सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM): भारत की परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत (INS Arihant) से दागी जाने वाली K-15 (सागरिका - रेंज 750 किमी) और K-4 (रेंज 3500 किमी) मिसाइलें भारत को समुद्र के भीतर से भी अचूक जवाबी परमाणु हमला करने की सर्वोच्च शक्ति प्रदान करती हैं।
  • समर एयर डिफेंस सिस्टम (SAMAR): भारतीय वायुसेना द्वारा पुरानी पड़ चुकी हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों (जैसे आर-73) को रीफर्बिश करके सतह-से-हवा में मार करने वाली एक त्वरित मिसाइल रक्षा प्रणाली 'SAMAR' का निर्माण किया गया है।
  • प्रलय (Pralay): यह भारत की नई वास्तविक सामरिक सतह-से-सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 150 से 500 किलोमीटर है। यह हवा में ही अपना प्रक्षेपवक्र (Path) बदलने की क्षमता रखती है, जिससे दुश्मन के इंटरसेप्टर इसे ट्रैक नहीं कर पाते।
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