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भूकम्प, ज्वालामुखी, मरुस्थल एवं विश्व के प्रमुख द्वीप

1 min read 36 views 06 Jul 2026 World Geography
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित भूकम्प के प्रकार व तरंगें, विश्व के प्रमुख सक्रिय व मृत ज्वालामुखी, मरुस्थल एवं क्षेत्रफल के आधार पर विश्व के सबसे बड़े द्वीपों के विस्तृत नोट्स
Key Points
  • भूकम्प मूल (Focus) वह आंतरिक स्थान है जहाँ से कंपन प्रारम्भ होता है, जबकि धरातल पर स्थित ठीक ऊपरी बिंदु को अधिकेन्द्र (Epicentre) कहते हैं.
  • प्राथमिक तरंगें (P Waves) ध्वनि तरंगों की तरह अनुदैर्ध्य होती हैं, जिनकी गति ठोस माध्यम में सर्वाधिक और तरल माध्यम में मंद हो जाती है.
  • इटली के सक्रिय ज्वालामुखी स्ट्राम्बोली को निरंतर प्रज्वलित गैसों के उत्सर्जन के कारण 'भूमध्यसागर का प्रकाश स्तंभ' कहा जाता है.
  • एण्डीज पर्वतमाला पर स्थित एकांकागुआ (6,960 मीटर) विश्व का सबसे ऊँचा मृत ज्वालामुखी शिखर है.
  • उपोष्ण उच्च वायुदाब और तापीय प्रतिलोमन के क्षेत्रों में वर्षा की कमी के कारण महाद्वीपों के आंतरिक भागों में मरुस्थलों की उत्पत्ति होती है.
  • ग्रीनलैंड विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है जो राजनीतिक रूप से डेनमार्क के अधीन है, जबकि न्यूगिनी क्षेत्रफल में दूसरे स्थान पर है.
  • इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता जावा द्वीप पर स्थित है, तथा मछलियों के प्रचुर उत्पादन के लिए कनाडा का न्यूफाउंडलैंड द्वीप प्रसिद्ध है.

भाग 1: भूकम्प (Earthquake) — प्रकार, तरंगें एवं मापन

पृथ्वी के भूरूपांतरण या भू-पटल में किसी ज्ञात या अज्ञात, अंतर्जात या बाह्य, प्राकृतिक या कृत्रिम कारणों से होने वाला कंपन ही भूकम्प (Earthquake) कहलाता है.

  • भूकम्प मूल (Focus) — धरातल के नीचे जिस स्थान पर भूकम्प की घटना का प्रारम्भ होता है उसे भूकम्प का उत्पत्ति केन्द्र या भूकम्प-मूल कहा जाता है.
  • भूकम्प अधिकेन्द्र (Epicentre) — भूकम्प मूल के ठीक ऊपर पृथ्वी के तल का वह स्थान, जहाँ सबसे पहले भूकम्पकीय तरंगों का पता चलता है, अधिकेन्द्र कहलाता है. यह बिन्दु भूकम्प मूल के निकटतम स्थित होता है.
  • सीस्मोलॉजी & सीस्मोग्राफ — भूकम्पमापी यन्त्र द्वारा अंकित लहरों का अध्ययन करने वाला विषय या विज्ञान सीस्मोलॉजी (Seismology) कहलाता है. जिस यन्त्र के द्वारा भूकम्पकीय लहरों का अंकन किया जाता है उसे सीस्मोग्राफ (Seismograph) कहते हैं.
  • समाघात रेखाएँ (Isoseismal Lines) — भूकम्पकीय लहरों द्वारा उत्पन्न समान आघात क्षेत्रों (Places of equal intensity) को मिलाने वाली रेखाओं को समाघात रेखाएँ कहते हैं. ये रेखाएँ प्रायः वृत्ताकार होती हैं जिनका केन्द्र अधिकेन्द्र होता है.

1. भूकम्प के प्रकार (गहराई के आधार पर)

गुटेनबर्ग तथा रिक्टर ने भूकम्प मूल की गहराई के आधार पर भूकम्प को तीन भागों में विभाजित किया है:

  1. सामान्य भूकम्प — 0–50 किमी. की गहराई.
  2. मध्यवर्ती भूकम्प — 50–250 किमी. की गहराई.
  3. गहरे पातालीय भूकम्प — 250–700 किमी. की गहराई.

2. भूकम्पकीय तरंगें (Seismic Waves)

भूकम्प के समय जो ऊर्जा भूकम्प मूल से निकलती है, उसे प्रत्यास्थ ऊर्जा कहते हैं. उत्पन्न होने वाली तरंगों को तीन श्रेणियों में रखा जाता है:

  • प्राथमिक अथवा लम्बवत् तरंगें (Primary / P Waves) — इन्हें P तरंगें भी कहा जाता है. ये अनुदैर्ध्य तरंगें हैं एवं ध्वनि तरंगों की तरह चलती हैं. तीनों भूकम्पकीय लहरों में सर्वाधिक तीव्र गति P तरंगों की होती है. यह ठोस के साथ-साथ तरल माध्यम में भी चल सकती है, परन्तु ठोस की तुलना में तरल माध्यम में इनकी गति मंद हो जाती है.
  • अनुप्रस्थ अथवा गौण तरंगें (Secondary / S Waves) — इन्हें S तरंगें भी कहा जाता है. ये प्रकाश तरंगों की भाँति व्यवहार करती हैं. ये सिर्फ ठोस माध्यम में ही चल सकती हैं और तरल माध्यम में प्रायः लुप्त हो जाती हैं. S तरंगों की तुलना में P तरंगों की गति 66% अधिक होती है.
  • धरातलीय तरंगें (Surface / Long Waves) — इन्हें L तरंगें भी कहा जाता है. ये पृथ्वी के ऊपरी भाग को ही प्रभावित करती हैं. ये अत्यधिक प्रभावशाली तरंगें हैं एवं सबसे लंबा मार्ग तय करती हैं. इनकी गति अत्यंत धीमी होती है एवं ये सबसे देर में पहुँचती हैं, परन्तु इनका प्रभाव सर्वाधिक विनाशकारी होता है. P व S लहरें युग्म में चलती हैं, जिनकी गति सर्वाधिक होती है.

विश्व के अधिकांश (63%) भूकम्प प्रशान्त महासागर तटीय पेटी (Circum-Pacific Belt) में तथा 21% भूकम्प मध्य महाद्वीपीय पेटी (Mid-continental belt) में आते हैं. भूकम्पों की तीव्रता का मापन मरकेली पैमाना तथा रिक्टर पैमाना के आधार पर किया जाता है.

भाग 2: ज्वालामुखी (Volcano) — वर्गीकरण एवं प्रमुख सूचियाँ

ज्वालामुखी से तात्पर्य उस छिद्र या दरार से है जिसमें होकर पृथ्वी के आन्तरिक भाग में स्थित लावा तथा अन्य पदार्थ ऊपर आते हैं. ज्वालामुखी के शीर्ष पर स्थित कीप के आकार के गर्त को क्रेटर कहा जाता है, तथा इसका विस्तृत रूप काल्डेरा कहलाता है. कुल सक्रिय ज्वालामुखी का अधिकांश भाग प्रशान्त महासागर के तटीय भागों में पाया जाता है.

1. ज्वालामुखी के प्रकार

  • सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcano) — जिसमें लावा, गैस, आदि के रूप में विखण्डित पदार्थ सदैव निकला करते हैं, उन्हें जाग्रत या सक्रिय ज्वालामुखी कहा जाता है. उदाहरण: इटली का एटना, स्ट्राम्बोली, हवाई द्वीप का मोनालोआ. इटली के स्ट्राम्बोली से हमेशा प्रज्वलित गैसें निकलती रहती हैं, जिससे इसे 'भूमध्यसागर का प्रकाश स्तंभ' भी कहा जाता है. सबसे विशाल ज्वालामुखी मोनालोआ है जो 10 किमी. लम्बी है. सौर मण्डल का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी मंगल ग्रह पर स्थित 'ओलंपस मॉन्स' है जिसका फैलाव 520 किमी. है. भारत में नारकोंडम (प्रसुप्त) एवं बैरन (सक्रिय) 2 ज्वालामुखी हैं जो अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित हैं. ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में एक भी ज्वालामुखी नहीं है.
  • प्रसुप्त ज्वालामुखी (Dormant Volcano) — जो उद्गार के बाद शान्त पड़ जाते हैं, परन्तु इनमें कभी भी उद्गार हो सकता है. उदाहरण: इटली का विसुवियस, इण्डोनेशिया का क्राकाटोआ, जापान का फ्यूजीयामा. जापान का फ्यूजीयामा पर्वत 'मिश्रित शंकु' का सर्वोत्तम उदाहरण है.
  • मृत ज्वालामुखी (Extinct Volcano) — जिनमें भूगर्भिक इतिहास के अनुसार बहुत लम्बे समय से पुनः उद्गार नहीं हुआ है. उदाहरण: म्याँमार का माउंट पोपा, अफ्रीका का किलिमन्जारो, ईरान का कोह सुल्तान तथा एण्डीज पर्वतमाला में स्थित **एकांकागुआ** (विश्व का सबसे ऊंचा मृत ज्वालामुखी, ऊँचाई 6,960 मीटर).
  • गीजर (Geyser) — ज्वालामुखी क्षेत्रों में विस्फोट के समय दरारों से होकर जल व वाष्प कुछ ऊँचाई तक झरने की तरह निकलते हैं, इन्हें गीजर कहते हैं. अमेरिका के यलोस्टोन पार्क में स्थित 'ओल्ड फेथफुल गीजर' सबसे प्रसिद्ध है.

2. विश्व के प्रमुख ज्वालामुखी (ऊँचाई के क्रमानुसार)

क्र.सं. ज्वालामुखी का नाम ऊँचाई (मी.) श्रेणी / स्थिति देश / अवस्थिति
1 ओजोसडेल सलाडो 6,885 मी. एण्डीज अर्जेन्टीना-चिली
2 गुआल्लाटीरी 6,060 मी. एण्डीज चिली
3 कोटोपैक्सी 5,897 मी. एण्डीज इक्वाडोर (विश्व का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी)
4 लैस्कर / तुंपुंगटीटो 5,641 मी. / 5,640 मी. एण्डीज चिली
5 पोपोकैटैपिटल / सँगे 5,451 मी. / 5,230 मी. अल्टीप्लानो डि / एण्डीज मैक्सिको / इक्वाडोर
6 क्ल्यूचेव्सकाया सोफ्का 4,850 मी. कमचटका प्रायद्वीप रूस
7 फ्यूजेस / मोनालोआ 4,590 मी. / 4,170 मी. एण्डीज / हवाई द्वीप कोलम्बिया / अमेरिका
8 माउंट एटना / माउंट सेंट हेलेन्स 3,308 मी. / 2,949 मी. सिसिली / कास्केड श्रेणी इटली / अमेरिका

3. विश्व के प्रमुख सक्रिय ज्वालामुखी एवं विवरण

क्र.सं. सक्रिय ज्वालामुखी अवस्थिति मुख्य विवरण / ऐतिहासिक तथ्य
1 एटना / स्ट्राम्बोली सिसिली तट / लिपारी द्वीप (इटली) 3,500 वर्षों से उद्गार जारी है / भूमध्य सागर का 'प्रकाश स्तंभ' कहलाता है.
2 यासुर / अम्ब्रिज तान्ना द्वीप / वनुआतु विगत 800 वर्षों से उद्गार जारी / वर्ष 1935 से उद्गार जारी.
3 दिनाकुला सोलोमन द्वीप यहाँ पर प्रथम अभिलेखित उद्गार 1595 ई. में दर्ज किया गया था.
4 लांगिला / बागाना पापुआ न्यूगिनी उद्गार चक्र वर्ष 2006 से शुरू होकर 2007 तक चला / सर्वाधिक सक्रिय ज्वालामुखी.
5 सेमेरू / मेरापी / दुकोनो इण्डोनेशिया जावा द्वीप का सर्वोच्च ज्वालामुखी पर्वत / सबसे सक्रिय / 1933 से लगातार उद्गार.
6 साकुरा जिमा / सुवानोसे जिमा जापान यह ऐरा काल्डेरा में स्थित है / यहाँ बुजोकु जनजाति का निवास स्थान है.

भाग 3: मरुस्थल (Deserts) — उत्पत्ति के कारण एवं सूची

मरुस्थल स्थलखंड के शुष्क व अर्द्धशुष्क भाग हैं, जो मुख्यतः उपोष्ण एवं उच्च वायुदाब क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ वायु नीचे उतरती है और तापीय प्रतिलोमन की स्थिति बनाती है. महाद्वीपीय अवस्थिति या तट से दूरी भी इसकी उत्पत्ति का कारण है. मरुस्थल चट्टानी, पथरीले या रेतीले तीनों प्रकार के हो सकते हैं.

विश्व के प्रमुख मरुस्थल

मरुस्थल का नाम देश / क्षेत्र क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) मरुस्थल का नाम देश / क्षेत्र क्षेत्रफल (वर्ग किमी.)
सहारा उत्तरी अफ्रीका 8,600,000 ऑस्ट्रेलियन ऑस्ट्रेलिया 1,550,000
अरेबियन सीरिया और सऊदी अरब 2,323,000 गोबी मध्य एशिया 1,300,000
कालाहारी दक्षिण अफ्रीका 930,000 रुबल खाली सऊदी अरेबिया 647,000
तुर्केनिशन / तकला मकान मध्य एशिया / चीन 450,000 / 270,000 थार / नूबियन भारत / उत्तरी अफ्रीका 200,000 / 259,000

भाग 4: द्वीप (Islands) — उत्पत्ति एवं विश्व के सबसे बड़े द्वीप

द्वीप स्थलखंड के ऐसे भाग हैं, जिनके चारों ओर जल का विस्तार पाया जाता है. उत्पत्ति के आधार पर इन्हें विवर्तनिक द्वीप, निक्षेपमूलक द्वीप, अपरदन मूलक द्वीप, ज्वालामुखी द्वीप और प्रवाल द्वीप के वर्गों में रखा जाता है.

क्षेत्रफल के आधार पर विश्व के 20 सबसे बड़े द्वीप

क्र.सं. द्वीप का नाम क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) भौगोलिक अवस्थिति व विवरण
1 ग्रीनलैंड 21,66,086 आर्कटिक एवं अटलांटिक महासागर के मध्य अवस्थिति, राजनीतिक रूप से डेनमार्क का भाग.
2 न्यूगिनी 7,85,753 प्रशान्त महासागर स्थित द्वीप जो ओशिनिया उपक्षेत्र के मेलानेशिया में स्थित है (इण्डोनेशिया एवं पापुआ न्यूगिनी).
3 बोर्नियो 7,48,168 दक्षिणी चीन सागर, सुलु सागर, सेलेबिज सागर, मकास्सर स्ट्रेट जावा सागर एवं कारीमाता स्ट्रेट से घिरा द्वीप (ब्रूनेई, इण्डोनेशिया एवं मलेशिया).
4 मेडागास्कर 5,87,713 हिन्द महासागर स्थित सबसे बड़ा द्वीप.
5 बैफिन द्वीप 5,07,451 कनाडा स्थित सबसे बड़ा द्वीप.
6 सुमात्रा 4,43,066 सुंडा स्ट्रेट, मलक्का स्ट्रेट एवं कारीमाता स्ट्रेट और हिन्द महासागर से घिरा इण्डोनेशिया का प्रमुख द्वीप.
7 होंशू 2,25,800 प्रशान्त महासागर स्थित जापान का सबसे बड़ा द्वीप.
8 विक्टोरिया / एल्समेरे 2,17,291 / 1,96,236 कनाडा स्थित दूसरा सबसे बड़ा द्वीप / कनाडा का तीसरा बड़ा द्वीप.
9 ग्रेट ब्रिटेन 2,09,331 यूनाइटेड किंगडम का प्रमुख द्वीप, इसी पर इंग्लैंड, स्कॉटलैंड एवं वेल्स स्थित हैं.
10 सफलावेसी 180,681 इंडोनेशिया का महत्वपूर्ण द्वीप.
11 दक्षिण द्वीप / उत्तरी द्वीप 1,45,836 / 111,583 प्रशान्त महासागर स्थित न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा द्वीप / न्यूजीलैंड का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप.
12 जावा द्वीप 138,794 इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता इसी पर अवस्थित है.
13 लुजोन 109,965 प्रशान्त महासागर स्थित फिलीपींस का सबसे बड़ा द्वीप.
14 न्यूफाउंडलैंड 108,860 कनाडा का द्वीप जहाँ मछलियाँ अत्यधिक मात्रा में पाई जाती हैं.
15 क्यूबा / आइसलँड 1,04,556 / 101,826 उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित / नॉर्वे के ऊपर (डेनमार्क के अधीन).
16 मिंडनाओ / आयरलैंड 97,530 / 84,421 फिलीपींस के पास अवस्थित / अटलांटिक महासागर में अवस्थित.
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