भारतीय न्यायपालिका: सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय
Table of Contents
- भारतीय न्यायपालिका (The Indian Judiciary)
- 1. सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
- न्यायाधीशों की योग्यताएँ एवं नियुक्ति
- वेतन, भत्ते एवं कार्यकाल (2026 अपडेट)
- सर्वोच्च न्यायालय के कार्य एवं क्षेत्राधिकार
- महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य व वाद (Quick Facts)
- 2. उच्च न्यायालय (High Court)
- गठन, योग्यताएं एवं नियुक्तियाँ
- अधीनस्थ न्यायालय व जिला न्यायाधीश (अनुच्छेद 233)
- लोक अदालत (Lok Adalat)
- भारत के प्रमुख उच्च न्यायालय (त्वरित तालिका)
Key Points
- भारतीय संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 124 के तहत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के गठन का प्रावधान है।
- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की 62 वर्ष है।
- कोलेजियम व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के समूह के परामर्श पर राष्ट्रपति नियुक्तियां करते हैं।
- न्यायमूर्ति वाई.वी. चंद्रचूड़ का मुख्य न्यायाधीश के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल रहा, जबकि न्यायमूर्ति के.एन. सिंह का कार्यकाल सबसे छोटा था।
- अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से विधिक मामलों पर परामर्श लेने का अधिकार देता है।
- वर्तमान समय में भारत में कुल 25 उच्च न्यायालय कार्यरत हैं, जिनमें सबसे नवीनतम आंध्र प्रदेश (अमरावती) है।
- राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ जोधपुर में है तथा इसकी खंडपीठ जयपुर में स्थित है।
- जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय के परामर्श (अनुच्छेद 233) से की जाती है।
- भारत की पहली लोक अदालत का सफल आयोजन महाराष्ट्र राज्य में किया गया था।
भारतीय न्यायपालिका (The Indian Judiciary)
भारत में एकल या एकीकृत न्यायपालिका (Integrated Judiciary) की व्यवस्था की गई है, जिसके शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय तथा राज्यों के स्तर पर उच्च न्यायालय व अधीनस्थ न्यायालय कार्यरत हैं।
1. सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-124 के तहत भारत में सर्वोच्च न्यायालय के गठन का प्रावधान किया गया है। संसद को यह विधिक अधिकार प्राप्त है कि वह समय-समय पर न्यायाधीशों की संख्या को निश्चित करे।
न्यायाधीशों की योग्यताएँ एवं नियुक्ति
- योग्यताएँ: वह भारत का नागरिक हो। किसी उच्च न्यायालय में या ऐसे दो या अधिक न्यायालयों में लगातार कम-से-कम 5 वर्षों तक न्यायाधीश के पद पर रह चुका हो, या किसी उच्च न्यायालय में कम-से-कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो, या राष्ट्रपति की दृष्टि में विधि का पारंगत विद्वान हो।
- नियुक्ति प्रक्रिया: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) इस प्रसंग में राष्ट्रपति को परामर्श देने के पूर्व अनिवार्य रूप से 'चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के समूह' (Collegium System) से विचार-विमर्श करते हैं।
वेतन, भत्ते एवं कार्यकाल (2026 अपडेट)
- वेतन: वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को 2,80,000 रुपये प्रति माह तथा अन्य न्यायाधीशों को 2,50,000 रुपये प्रति माह वेतन प्राप्त होता है। इनके वेतन व भत्ते भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित होते हैं।
- कार्यकाल: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की कार्यअवधि उनकी आयु के 65 वर्ष तक की होती है। इससे पूर्व वे राष्ट्रपति को संबोधित कर अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
- महाभियोग (अनुच्छेद 124(4)): न्यायाधीशों को केवल 'प्रमाणित कदाचार' तथा 'शारीरिक या मानसिक असमर्थता' के आधार पर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित महाभियोग प्रस्ताव के माध्यम से हटाया जा सकता है। अब तक केवल दो बार महाभियोग प्रक्रिया की आवश्यकता हुई (प्रथम बार 1991-93 में न्यायाधीश आर. रामास्वामी के विरुद्ध तथा 2011 में सौमित्र सेन के विरुद्ध)।
सर्वोच्च न्यायालय के कार्य एवं क्षेत्राधिकार
- प्रारंभिक क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 131): इसके अंतर्गत केंद्र व राज्यों या राज्यों के आपसी विवादों का निपटारा सीधे सर्वोच्च न्यायालय में होता है।
- अपीलीय क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 132): यह देश का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है, जहाँ उच्च न्यायालयों के अंतिम निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनी जा सकती है, बशर्ते उसमें संविधान की व्याख्या का प्रश्न शामिल हो।
- परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 143): इसके तहत राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के किसी विधिक मामले पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांग सकता है, परंतु न्यायालय सुझाव देने या राष्ट्रपति उसे मानने के लिए बाध्य नहीं है।
- न्यायिक पुनर्वलोकन (Judicial Review): संसद या विधानमण्डलों द्वारा पारित किसी अधिनियम तथा कार्यपालिका के आदेशों की वैधानिकता की जांच करने का पूर्ण अधिकार है।
- मौलिक अधिकारों का संरक्षक (अनुच्छेद 32): नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायालय पांच प्रकार की रिटें (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार-पृच्छा) जारी करता है।
- अंतरण का क्षेत्राधिकार: उच्चतम न्यायालय उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को अपने यहाँ अंतारित (Transfer) कर सकता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य व वाद (Quick Facts)
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: हीरालाल जे. कानिया।
- प्रथम महिला न्यायाधीश: मीरा साहिब फातिमा बीबी (सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान समय तक कोई महिला मुख्य न्यायाधीश (CJI) नहीं बनी हैं)।
- सबसे लम्बा कार्यकाल: मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वाई.वी. चंद्रचूड़ (यशवंत विष्णु चंद्रचूड़) का रहा (7 वर्ष, 4 माह, 20 दिन)।
- सबसे कम कार्यकाल: न्यायमूर्ति के.एन. सिंह (कमल नारायण सिंह - मात्र 18 दिन)।
- न्यायिक सक्रियता व PIL: 17वें मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती को भारत में 'लोक हित वाद' (Public Interest Litigation-PIL) का प्रणेता माना जाता है।
- स्वतंत्र भारत में जन्मे प्रथम CJI: 38वें मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.एच. कपाड़िया थे।
- प्रथम दलित CJI: 37वें मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.जी. बालकृष्णन थे।
2. उच्च न्यायालय (High Court)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा, लेकिन संसद विधि द्वारा दो या अधिक राज्यों और किसी संघ राज्य क्षेत्र के लिए एक ही संयुक्त उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है (जैसे पंजाब-हरियाणा व चंडीगढ़)। वर्तमान में देश में कुल 25 उच्च न्यायालय कार्यरत हैं (आंध्र प्रदेश के अमरावती में स्थापित देश का 25वां उच्च न्यायालय है)।
गठन, योग्यताएं एवं नियुक्तियाँ
- गठन (अनुच्छेद 216): प्रत्येक उच्च न्यायालय का गठन एक मुख्य न्यायाधीश तथा ऐसे अन्य न्यायाधीशों से मिलकर होता है, जिन्हें समय-समय पर राष्ट्रपति निर्धारित करें।
- योग्यताएँ: वह भारत का नागरिक हो, भारत के राज्य क्षेत्र में कम-से-कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर कार्य कर चुका हो अथवा किसी उच्च न्यायालय में लगातार कम-से-कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो।
- नियुक्ति: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श लेकर करता है। अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सलाह भी ली जाती है।
- शपथ ग्रहण व कार्यकाल: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को राज्य के राज्यपाल के समक्ष शपथ लेनी होती है। इनके अवकाश ग्रहण करने की अधिकतम आयु सीमा 62 वर्ष निर्धारित है।
- वेतन व भत्ते: वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश को 2,50,000 रुपये प्रति माह तथा अन्य न्यायाधीशों को 2,25,000 रुपये प्रति माह वेतन प्राप्त होता है (इनका वेतन राज्य की संचित निधि से दिया जाता है, परंतु पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है)।
- न्यायाधीशों पर प्रतिबंध (अनुच्छेद 220): उच्च न्यायालय का कोई स्थायी न्यायाधीश पदमुक्ति के पश्चात् उस उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ न्यायालयों में वकालत नहीं कर सकता, परंतु वह अन्य उच्च न्यायालयों या सर्वोच्च न्यायालय में वकालत कर सकता है।
अधीनस्थ न्यायालय व जिला न्यायाधीश (अनुच्छेद 233)
- अनुच्छेद 233(1) के अनुसार जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदस्थापना और प्रोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है।
- इसके लिए वह व्यक्ति न्यूनतम 7 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो तथा उच्च न्यायालय ने उसके नाम की सिफारिश की हो। जिला न्यायालयों पर उच्च न्यायालय का पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण होता है (अनुच्छेद 235)।
- अधीनस्थ न्यायालय मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं — (1) दीवानी न्यायालय (Civil Court), (2) फौजदारी न्यायालय (Criminal Court), (3) राजस्व न्यायालय (Revenue Court)।
लोक अदालत (Lok Adalat)
- लोक अदालत कानूनी विवादों के मैत्रीपूर्ण समझौते के लिए एक वैधानिक मंच है, जो वैकल्पिक विवाद समाधान का हिस्सा है।
- यह लोक उपयोगी सेवाओं के विवादों के संबंध में मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए अत्यंत सफल माध्यम है। इसमें फौजदारी मामलों (शमनीय अपराधों को छोड़कर) को छोड़कर सभी दीवानी, राजस्व व श्रम विवाद आपसी समझौते के लिए ले जाए जा सकते हैं।
- ऐतिहासिक तथ्य: भारत में पहली लोक अदालत का आयोजन महाराष्ट्र राज्य में किया गया था।
भारत के प्रमुख उच्च न्यायालय (त्वरित तालिका)
| क्र.सं. | उच्च न्यायालय का नाम | स्थापना वर्ष | राज्य क्षेत्रीय अधिकारिता | मुख्य पीठ (अवस्थित) | खंडपीठ |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | बम्बई (मुंबई) | 1862 | महाराष्ट्र, गोवा, दादरा एवं नगर हवेली, दमन और दीव | मुंबई | नागपुर, पणजी और औरंगाबाद |
| 2 | कलकत्ता (कोलकाता) | 1862 | पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | कोलकाता | पोर्ट ब्लेयर |
| 3 | मद्रास (चेन्नई) | 1862 | तमिलनाडु और पुदुचेरी | मद्रास (चेन्नई) | मधुरै |
| 4 | इलाहाबाद | 1866 | उत्तर प्रदेश | इलाहाबाद (प्रयागराज) | लखनऊ |
| 5 | राजस्थान | 1949 | राजस्थान | जोधपुर | जयपुर |
| 6 | दिल्ली | 1966 | दिल्ली | नई दिल्ली | - |