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राजस्थान के लोक नृत्य, वाद्य यंत्र, लोकगीत एवं लोक नाट्य

1 min read 58 views 06 Jul 2026 Rajasthan GK
राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्य (घूमर, गैर, तेरहताली, भवाई, कच्छी घोड़ी आदि), वाद्य यंत्रों की श्रेणियाँ (तत्, अनद्ध, सुशिर, घन), लोकगीतों के प्रकार एवं लोक नाट्य (ख्याल, रम्मत, तमाशा, फड़, स्वांग) की विस्तृत जानकारी।
Key Points
  • घूमर — राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध लोक नृत्य (भील एवं गरसिया जाति)
  • तेरहताली — रामदेवजी के भोपों का नृत्य, 13 मंजीरे शरीर पर बाँधी जाती हैं
  • भवाई — संतुलन-आधारित पेशेवर नृत्य
  • कच्छी घोड़ी — नकली घोड़ी बनाकर वीरतापूर्ण नृत्य
  • रावणहत्था — राजस्थान का सबसे प्राचीन वाद्य यंत्र (तत् श्रेणी)
  • लंगा-मांगणियार — प्रसिद्ध पेशेवर लोक गायक समुदाय

राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्य

राजस्थान की लोक नृत्य परम्परा शताब्दियों पुरानी है। ये नृत्य प्रायः त्योहारों, पर्वों एवं विशेष अवसरों पर किए जाते हैं। राजस्थान में प्रचलित प्रमुख लोक नृत्य निम्नलिखित हैं:

  • घूमर — राजस्थान का सबसे लोकप्रिय नृत्य, भील एवं गरसिया जाति द्वारा किया जाता है।
  • गैर नृत्य — मारवाड़ एवं मेवाड़ क्षेत्र का प्रमुख नृत्य।
  • तेरहताली — रामदेवजी के भोपों द्वारा किया जाने वाला नृत्य, जिसमें शरीर पर 13 मंजीरे बाँधी जाती हैं।
  • भवाई नृत्य — पेशेवर लोक नर्तकों द्वारा किया जाने वाला संतुलन-आधारित नृत्य।
  • कच्छी घोड़ी नृत्य — नकली घोड़ी बनाकर किया जाने वाला वीरतापूर्ण नृत्य।
  • गीदड़ नृत्य — शेखावाटी क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य।
  • डाँडिया नृत्य — मारवाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय नृत्य।
  • झूमर नृत्य — राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्रों में प्रचलित।
  • धुङ्गला नृत्य — विशेष अवसरों पर किया जाने वाला नृत्य।
  • दाप नृत्य — पश्चिमी राजस्थान में प्रचलित।
  • वालर नृत्य — गरसिया जाति का नृत्य।
  • शंकरिया नृत्य — कालबेलिया जाति का नृत्य।
  • फड़ नृत्य — भोपों द्वारा किया जाने वाला चित्रकथा नृत्य।
  • गौरी नृत्य — भील जाति का नृत्य।
  • चकरी नृत्य — गूजर जाति का लोक नृत्य (चरी नृत्य)।
  • अभिन्न नृत्य — जनजातीय सिद्ध समुदाय द्वारा किया जाता है।
  • बम नृत्य — अलवर एवं भरतपुर क्षेत्र का नृत्य।

जातियों/क्षेत्रों के अनुसार नृत्य

क्रम जातियाँ/क्षेत्र प्रमुख नृत्य
1 भील घूमर, गैर, नेजा, गौरी
2 कालबेलिया इण्डोणी, शंकरिया, बागड़िया
3 गरसिया घूमर, गरबा, वालर
4 शेखावाटी क्षेत्र चंग, गीदड़, डाँडिया
5 जालौर क्षेत्र डोल नृत्य
6 जनजातीय सिद्ध अभिन्न नृत्य
7 मारवाड़ क्षेत्र डाँडिया, गीदड़
8 अलवर एवं भरतपुर बम नृत्य

राजस्थान के वाद्य यंत्र

राजस्थान की संगीत प्रस्तुति एवं नृत्य कला को स्थापित करने में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की अहम भूमिका रही है। वाद्य यंत्रों को चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

वाद्य श्रेणियाँ एवं प्रमुख वाद्य यंत्र

क्रम श्रेणी प्रमुख वाद्य यंत्र
1 तत् (तार वाले) इकतारा, रावणहत्था, सारंगी, जंतर, खड़ताल, अपंग, तन्दूरा, चौतारा, निशान, चिकारा, दंतारा, कमाईचा
2 अनद्ध (चमड़े वाले) ढोलक, मंजीरा, खंजरी, चंग, नगाड़ा, मृदंग, ढोल, नौबत, मादल, डफ, टाक, डमरू, तासा, मटकी, घोसा, कुंडी, घेरा
3 सुशिर (फूंकने वाले) शहनाई, सतारा, पूंगी, अलगोजा, बाँसुरी, नग्ग, मौरचंग, मक्का, तुरही, सिंगी, वांकिया, मुरली, शंख
4 घन (धातु के) तासी, थाली, ताल, घुघरू, डाँडिया, घंटिका, करताल, कटाल, भाण्ड, चौचिया, मंजीरा, घंटा, चूड़ियाँ

राजस्थान के लोकगीत

1. भक्ति रचनाएँ एवं धार्मिक गीत

भक्त द्वारा भगवान की आराधना के गीत। इनमें लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश, दुर्गा, शीतला, शिव, पार्वती के साथ-साथ तीजाजी, गोगाजी, पाबूजी, रामदेवजी आदि लोक देवताओं के आराधना गीत गाए जाते हैं।

2. पेशेवर गीत

राजस्थान की कुछ जातियों ने संगीत को पेशे के रूप में अपनाया है — लंगा, मांगणियार, भोपे, जोगी, कामण, कांगड़, ढोली, मिरासी, नायक आदि।

3. आदिवासी गीत

राजस्थानी लोक संगीत की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक। तीन और पाँच स्वरों का संयोजन होता है। त्योहारों, खुशी के अवसरों पर गाया जाता है।

4. पर्वोत्सव गीत

  • गणगौर के अवसर पर — घुड़लो, पणिहारी, चौपड़ा, खरपोली, चरवो, गोबलियाँ
  • तीज के अवसर पर — हिण्डोली, पीपली, मुरली, लहरियाँ, डागलियाँ
  • होली के अवसर पर — चंग, निम्बुवो, खाण्डो, वाची, दड़ी

प्रसिद्ध गणगौर गीत — "खुल्ला दो गणगौर भंवर म्हानें खेलण दो गणगौर"

5. गृहस्थों के मांगलिक एवं पारिवारिक गीत

शादी-विवाह, गृहप्रवेश, शिशु-जन्म आदि अवसरों पर गाए जाने वाले गीत। लोरी, जवई, केलेबे, बना-बनी, फेरे, भिंगड़ूली, जनेऊ, विदाई, गाड़लू आदि प्रसिद्ध हैं।

राजस्थान का लोक नाट्य (नृत्य, गीत मिश्रित)

क्रम लोक नाट्य विवरण
1 ख्याल राजस्थान के लोक नाट्य की सबसे लोकप्रिय विधा। वीर रस प्रधान। प्रसिद्ध ख्याल — पद्मानी रो ख्याल, अमरसिंह रो ख्याल, रुद्री राणी रो ख्याल, पार्वती रो ख्याल।
2 रम्मत लोक नाट्य कला का विकास बीकानेर में हुआ। मुख्य वाद्य — नगाड़ा एवं ढोलक। विषय — चौमासा, रामदेवजी का भजन, लावणी, गणपति वन्दना।
3 तमाशा जयपुर की गौरवशाली परम्परा। प्रारम्भ — 19वीं शताब्दी में महाराजा प्रताप सिंह के काल में। भट्ट परिवार तमाशा से मुख्य रूप से जुड़ा हुआ।
4 फड़ भोपों द्वारा खेली जाती है। भोपा रावणहत्था बजाता हुआ नाचता-गाता है। प्रसिद्ध फड़ें — पाबूजी की फड़, देवनारायण जी की फड़
5 लीलाएँ सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक पक्ष का चित्रण। राम लीला, रास लीला प्रसिद्ध।
6 नौटंकी मुख्य रूप से भरतपुर और धौलपुर में प्रदर्शित।
7 स्वांग भरतपुर की प्राचीन मनोरंजक विधा। खुले स्थानों पर मंचन।

प्रमुख तथ्य:

  • घूमर नृत्य — राजस्थान का सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य, महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • रावणहत्था — राजस्थान का सबसे प्राचीन तार वाला वाद्य यंत्र, भोपों द्वारा उपयोग किया जाता है।
  • अलगोजा — दो बाँसुरियों को मिलाकर बजाया जाने वाला वाद्य यंत्र।
  • तेरहताली में शरीर पर 13 मंजीरे बाँधी जाती हैं।
  • लंगा-मांगणियार — राजस्थान के प्रसिद्ध पेशेवर लोक गायक समुदाय।
  • भवाई नृत्य — सिर पर घड़ा/तलवार रखकर संतुलन बनाने वाला नृत्य।
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