राजस्थान की राजव्यवस्था - राज्यपाल, विधानसभा, न्यायालय व आयोग
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06 Jul 2026
Rajasthan GK
राजस्थान की राजव्यवस्था — राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य विधानसभा, उच्च न्यायालय, RPSC, मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग एवं राज्य सूचना आयोग की सम्पूर्ण जानकारी RPSC, RAS, RSMSSB, Patwar, SI, REET 2026 हेतु।
Table of Contents
Key Points
- राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा 5 वर्षों के लिए — राज्यपाल पद का प्रावधान 1 नवम्बर 1956 को — प्रथम राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह
- राजस्थान विधानसभा में 200 सीटें — प्रथम अध्यक्ष नरोत्तम जोशी — प्रथम महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
- राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में — खंडपीठ जयपुर — कुल स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 50 — प्रथम मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा
- RPSC की स्थापना 16 अगस्त 1949 — प्रथम अध्यक्ष सर एस.के. घोष — मुख्यालय अजमेर
- राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग — प्रथम निर्वाचन आयुक्त अमर सिंह राठौड़ — कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष
- राज्य सूचना आयोग का गठन 13 अप्रैल 2006 — प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त एम.डी. कौरानी — मुख्यालय जयपुर
राज्यपाल
संसदीय शासन प्रणाली के अंतर्गत दो प्रकार की कार्यपालिकाएँ होती हैं — 1. नामात्र की कार्यपालिका तथा 2. वास्तविक कार्यपालिका। राज्यपाल जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सामान्य रूप से 5 वर्षों के लिए की जाती है, वह वैधानिक शासक है।
- राज्यपाल के समस्त अधिकारों का प्रयोग मंत्रिमंडल करता है — अर्थात् राज्यपाल नामात्र का कार्यपालिका है
- मंत्रिमंडल का प्रधान मुख्यमंत्री होता है — मंत्रिमंडल राज्य के समस्त अधिकारों का प्रयोग राज्यपाल के नाम से करता है
- राज्य में राज्यपाल पद का प्रावधान 1 नवम्बर 1956 को किया गया तथा श्री गुरुमुख निहाल सिंह पहले राज्यपाल थे
मुख्यमंत्री
- राज्य विधान सभा में बहुमत दल द्वारा मंत्रिमंडल का गठन किया जाता है, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री कहलाता है
- राज्यपाल मुख्यमंत्री को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाता है
- राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद् का गठन करता है — मंत्रिपरिषद् एक परामर्शदायी संस्था ही नहीं, बल्कि राज्य की वास्तविक कार्यपालिका है
- मुख्यमंत्री को राज्य विधान सभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त होता है — मंत्रिपरिषद् राज्य की विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है
- टीकाराम पालीवाल राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री थे
- राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनने का श्रेय श्रीमती वसुंधरा राजे को प्राप्त है
राज्य विधानसभा
- राजस्थान में एकसदनीय व्यवस्थापिका का प्रावधान है
- विधान सभा में सीटों की कुल संख्या 200 है
- प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाला प्रत्याशी निर्वाचित घोषित होता है
- विधान सभा के सदस्य अपने बीच से एक विधान सभा अध्यक्ष तथा एक विधान सभा उपाध्यक्ष का चुनाव करते हैं
- राजस्थान विधान सभा का प्रथम अध्यक्ष बनने का श्रेय श्री नरोत्तम जोशी को प्राप्त है
- श्री लाल सिंह शक्तावत राज्य विधान सभा के प्रथम उपाध्यक्ष थे
उच्च न्यायालय
- राजस्थान के अस्तित्व में आने से पूर्व यहाँ स्थित रियासतों के अपने-अपने मुख्य न्यायालय थे
- भारत को आजादी मिलने के बाद संविधान के लागू होने पर राजस्थान में जोधपुर में एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई — इस उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ जयपुर में स्थापित की गई
- वर्तमान समय में उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या 50 है
- राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री कमलकांत वर्मा थे
- राजस्थान उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है
- ये न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहते हैं
- मुख्य न्यायाधीश को ₹2,50,000 तथा अन्य न्यायाधीशों को ₹2,25,000 मासिक वेतन के रूप में मिलते हैं
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)
- राजस्थान लोकसेवा आयोग की स्थापना 16 अगस्त, 1949 को राज्य में लोकसेवकों की भर्ती करने के लिए सलाह देने हेतु एक अध्यादेश के द्वारा की गई थी
- यह अध्यादेश 20 अगस्त, 1949 से प्रभाव में आया
- सर एस.के. घोष इस आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे
- आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है
- राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर में स्थित है
राजस्थान मानवाधिकार आयोग
- मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 — संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जिसके अनुसार राष्ट्रीय स्तर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग एवं राज्य स्तर पर राज्य मानव अधिकार आयोग की स्थापना करने की व्यवस्था है
- राजस्थान की राज्य सरकार ने दिनांक 18 जनवरी, 1999 को एक अधिसूचना राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन के संबंध में जारी की
- मानव अधिकार संरक्षण (संशोधित) अधिनियम, 2006 के अनुसार राज्य मानव अधिकार आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्य का प्रावधान किया गया है
- राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्य में मानव अधिकारों की रक्षा हेतु निगरानी संस्था के रूप में कार्य करना है
- आयोग के अध्यक्ष पद पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ही नियुक्त किया जा सकता है
- आयोग सचिव राज्य सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी से कम का नहीं हो सकता
- राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष व सदस्य अपना पद ग्रहण करने की तिथि से 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक पद धारण कर सकेंगे
लोकायुक्त
- राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 (अधिनियम सं. 9 सन् 1973) द्वारा राजस्थान के मंत्रियों, सचिवों, राजकीय प्रतिष्ठानों के अध्यक्षों, स्वायत्त शासन संस्थाओं के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, प्रमुखों, प्रधानों एवं अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं अकर्मण्यता की जाँच के लिए स्थापित एक उच्चस्तरीय वैधानिक एवं स्वतंत्र संस्था है
- लोकायुक्त के रूप में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (सेवारत या सेवानिवृत्त) को नियुक्त किया जाता है
- राज्य के प्रथम लोक आयुक्त आई.डी. दुआ थे
- राज्य लोकायुक्त संस्था को मंत्रियों तथा राज्य कार्मिकों के विरुद्ध जनता से प्राप्त शिकायतों की जाँच का अधिकार दिया गया है — लेकिन कोई भी लोक सेवक लोकायुक्त से शिकायत नहीं कर सकता
- अगर लोकायुक्त को शिक्षावत हो जाए कि किसी शिकायतकर्ता ने दुर्भावनावश कोई शिकायत की है तो वह उसे दंडित कर सकता है
राज्य निर्वाचन आयोग
- 73वें संविधान संशोधन, 1992 के अधीन प्रत्येक राज्य में पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी निकायों के चुनाव निष्पक्ष व समय पर करवाने हेतु पृथक से राज्य चुनाव आयोग की स्थापना की गई है
- इसकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है तथा उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही पद से हटाया जा सकता है
- अधिनियम के तहत राजस्थान में राज्यपाल द्वारा निर्वाचन आयोग (एक सदस्यीय) का गठन कर दिया गया है
- राजस्थान के प्रथम निर्वाचन आयुक्त श्री अमर सिंह राठौड़ थे
- इनका कार्यकाल कार्यग्रहण की तिथि से 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) होता है
मुख्य निर्वाचन अधिकारी
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा '13 क' में प्रत्येक राज्य में एक मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति की जाती है
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग के अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण में रहते हुए संसद और विधानसभा निर्वाचनों का संचालन एवं मतदाता सूचियों की तैयारी, पुनरीक्षण एवं संशोधन संबंधी कार्यों का पर्यवेक्षण करते हैं
- आयोग, राज्य सरकार से परामर्श कर मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति करता है, जो राज्य सरकार का लोक सेवक होता है
राज्य सूचना आयोग
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 के तहत राजस्थान राज्य सूचना आयोग का गठन किया गया है
- आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त व आवश्यकतानुसार (अधिकतम दस) राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त हो सकते हैं
- राजस्थान राज्य सूचना आयोग को 13 अप्रैल, 2006 को गठित किया गया जिसे राजपत्र में अधिसूचित कर दिया गया है
- राज्य के प्रथम राज्य मुख्य सूचना आयुक्त श्री एम.डी. कौरानी थे
- आयोग एक वैधानिक निकाय है जो पूर्णतः स्वायत्तशासी है तथा अपने कार्यों के निष्पादन में किसी अन्य प्राधिकारी से निर्देश प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है
- राजस्थान राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय जयपुर में है
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 18, 19, 20 और 25 में सूचना आयोग के कृत्य एवं शक्तियों का वर्णन है — आयोग नागरिकों से प्राप्त परिवादों की जाँच कर नाम नियुक्तित करने, अपील में बतौर अपील अधिकारी निर्णय देने, दोषी अधिकारियों को दंडित करने का अधिकार रखता है
- मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य सूचना आयुक्त की पदावधि पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) होती है
- मुख्य सूचना आयुक्त व अन्य सूचना आयुक्तों को साबित कदाचार या अक्षमता के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर राज्यपाल द्वारा कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व हटाया जा सकता है