राज्य का मुख्य सचिव एवं जिला प्रशासन - सम्पूर्ण जानकारी
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Key Points
- मुख्य सचिव राज्य के सचिवालय का प्रधान होता है — वह मंत्रिमंडल का सचिव, नीति निर्माण में सलाहकार तथा केंद्र-राज्य संचार की मुख्य कड़ी है
- संकटकालीन समय में मुख्य सचिव राज्यों के 'नर्वस सिस्टम' की भाँति कार्य करता है — राष्ट्रपति शासन में सम्पूर्ण प्रशासन का संचालन करता है
- एस.एस. खेरा के अनुसार — "जिला-प्रशासन जनता और सरकारी प्रक्रिया के बीच संपर्क स्थापित करता है — यह लोक प्रशासन-रूपी हथियार की धार है"
- 1772 में वारेन हेस्टिंग्ज ने कलेक्टर के पद को सशक्त रूप में स्थापित किया — 1781 में और मजबूत किया गया
- जिला-प्रशासन का ढाँचा तीन स्तरीय है — जिला, उपखंड और तहसील
- जिला-प्रशासन के मुख्य कार्यक्षेत्र — कानून व्यवस्था, राजस्व, भूमि सुधार, कृषि, निर्वाचन, संकटकाल प्रबंधन
राज्य का मुख्य सचिव
प्रत्येक राज्य में सचिवालय का प्रधान मुख्य सचिव होता है। वह सदैव सामान्य प्रशासन विभाग का प्रभारी होता है जो मुख्यमंत्री के कार्यक्षेत्र का अंश है। उसका नियंत्रण सचिवालय के अन्य सभी विभागों तक व्यापक है।
सामान्यतः वह राज्य की लोक-सेवाओं का प्रमुख है। वह अधिकारियों का सामान्य मार्गदर्शन करता है। इस प्रकार वह राज्य की प्रशासन-व्यवस्था का नेतृत्व करता है।
मुख्य सचिव केन्द्र शासन या अन्य राज्य-शासनों तथा अपने राज्य-शासन के बीच संचार की मुख्य कड़ी है। राज्य शासन में वह एक ऐसा पदाधिकारी है जिसका केंद्र शासन में कोई समतुल्य नहीं है।
मुख्य सचिव के कार्य
- मंत्रिमंडल का सलाहकार: मुख्य सचिव प्रशासनिक मामलों में मंत्रिमंडल के सलाहकार के रूप में कार्य करता है — वह पूर्ण प्रशासनिक तंत्र का मुखिया होता है — राज्य सरकार के कतिपय विभागों का कार्यकारी अध्यक्ष भी होता है
- मंत्रिमंडल का सचिव: मंत्रिमंडल के सचिव के रूप में वह मंत्रिमंडल की बैठकों का एजेंडा तैयार करता है, बैठकों की व्यवस्था करता है तथा कार्यवाहियों का रिकॉर्ड रखता है — मुख्य सचिव द्वारा मंत्रिमंडल की बैठकों में जो भी मामले प्रस्तुत किए जाते हैं वह सभी प्रेषित किए जाते हैं, चाहे वह किसी भी विभाग से संबंधित हों
- नीति निर्माण में सहायता: मुख्य सचिव मंत्रिमंडल की नीति निर्माण के संबंध में आवश्यक सहायता और सलाह देता है — वह मंत्रिमंडल की सभी बैठकों में भाग लेता है — कई बार मुख्य सचिव स्वयं अपनी ओर से किसी भी मामले पर विचार प्रस्तुत कर सकता है
- संचार माध्यम: मुख्य सचिव अपने राज्य तथा केंद्र और अन्य राज्य सरकारों के बीच आवश्यक संचार माध्यम का कार्य करता है — सामान्यतः अंतरराज्यीय सद्भाव और मतभेदों के सभी मामलों पर उसकी सलाह ली जाती है
- विभागों का प्रभारी: राज्य प्रशासन में मुख्य सचिव कई बार कतिपय विभागों का प्रभारी भी होता है — बिहार एवं झारखंड में सामान्य प्रशासन, कार्मिक और प्रशासनिक सुधार, मंत्रिमंडल सचिवालय तथा योजना विभाग मुख्य सचिव के पास हैं
- लोक सेवाओं का अध्यक्ष: लोक सेवाओं का अध्यक्ष है तथा सरकारी सेवा वर्ग की नियुक्ति, स्थानांतरण तथा पद विमुक्ति आदि की शक्तियाँ उसमें निहित हैं
- शांति एवं व्यवस्था: राज्य में शांति व व्यवस्था बनाए रखने के लिए वह आवश्यक कार्यवाही करता है
- केन्द्रीय रिकॉर्ड ब्रांच: वह केन्द्रीय रिकॉर्ड ब्रांच, सिचवालय, पुस्तकालय तथा अधिकारी संशोधन स्टाफ पर जो सचिवालय के सभी विभागों में कार्य करता है, पर्यवेक्षण रखता है
- संकटकालीन भूमिका: संकटकालीन समय में वह राज्यों के 'नर्वस सिस्टम' की भाँति कार्य करता है — यदि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता है, तो वह सम्पूर्ण राज्य प्रशासन के संचालन के लिए उत्तरदायी होता है
जिला प्रशासन
जिला-प्रशासन को लोक प्रशासन का ही एक अंग माना जा सकता है। एस.एस. खेरा ने इसी आधार पर जिला-प्रशासन की परिभाषा करते हुए लिखा है —
"जिला-प्रशासन लोक प्रशासन का एक अंग है, जो एक जिले की क्षेत्रीय सीमाओं के अंतर्गत कार्य करता है।"
वास्तव में, जिला-प्रशासन का अर्थ होता है जिले के सार्वजनिक तथा सरकारी कार्यों का नियंत्रण, निर्देशन तथा कार्यान्वयन करना। एस.एस. खेरा के शब्दों में — "जिला-प्रशासन जनता और सरकारी प्रक्रिया के बीच संपर्क स्थापित करता है। वास्तव में, यह लोक प्रशासन-रूपी हथियार की धार है।"
भारत में जिला प्रशासन : ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- सन् 1772 में वारेन हेस्टिंग्ज ने राजस्व, कानून और व्यवस्था को मिलाकर कलेक्टर के पद को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया
- सन् 1781 में इस पद को और अधिक मजबूत किया गया
जिला-प्रशासन : ढाँचा
भारत में जिला-प्रशासन का एक सम्पूर्ण ढाँचा एक पदसोपान युक्त व्यवस्था के रूप में देखा जा सकता है। सामान्यतः इसके स्तर तीन तथा कभी-कभी दो या चार भी होते हैं।
- प्रथम स्तर: जिला — इसका मुख्यालय जिले के प्रमुख नगर में होता है
- द्वितीय स्तर: जिले के अंतर्गत उपखंड का मुख्यालय
- तृतीय स्तर: तहसील कार्यालय
ये तीनों स्तर जिले में सामान्य प्रशासन की दृष्टि से बनाए जाते हैं किन्तु विकास कार्यों के लिए अधिकतर राज्यों में प्रशासन की इकाई 'ब्लॉक' है।
जिला-प्रशासन का क्षेत्र
- कानून एवं व्यवस्था कायम रखना: जिला-प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र — सार्वजनिक कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना और मौलिक अधिकारों की यथासंभव रक्षा करना
- राजस्व: जिले का संगठन ही राजस्व-प्रशासन के उद्देश्य से किया गया है
- भूमि-सुधार, रेकार्ड तथा व्यवस्था: जिले में चलने वाले भूमि-सुधार के कार्य तथा भूमि-संबंधी आँकड़ों का संग्रह, भूमि-एकीकरण आदि विषय
- कृषि, सिंचाई और उद्योग: किसी भी क्षेत्र के प्रशासन की सफलता उस क्षेत्र के आर्थिक जीवन पर बहुत हद तक निर्भर करती है
- आपूर्ति तथा यातायात: नागरिकों के लिए खाद्य पदार्थों एवं अन्य अनिवार्य जीवन-सामग्री को उपलब्ध कराने की व्यवस्था — इसी उद्देश्य से प्रत्येक जिले में एक जिला आपूर्ति-पदाधिकारी (District Supply Officer) के पद की व्यवस्था की गई है
- सामुदायिक विकास, सहयोग-समिति, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा लोक कल्याण: जिले के नागरिकों का सर्वांगीण विकास हो सके — इसके लिए सभी तरह के कदम उठाने आवश्यक हैं
- स्वायत्त शासन: आधुनिक युग लोकतांत्रिक विकेंद्रीयकरण (Democratic decentralization) का युग है — स्थानीय स्वायत्त संस्थाओं का विकास आवश्यक प्रतीत होता है
- निर्वाचन: जिला-प्रशासन का कर्तव्य निर्वाचन का भी प्रबंध करना है — संसद, राज्य-विधानमंडल एवं सभी स्वायत्त संस्थाओं के लिए निर्वाचन कार्यों की देखभाल करना भी जिला-प्रशासन का ही कार्य है
- संकटकाल: जिले में संकटकाल आ जाने पर उसका डटकर मुकाबला करना भी जिला-प्रशासन के ही कार्यक्षेत्र में आता है
जिला-प्रशासन की भूमिका और उसका महत्व
- राज्य में जिला प्रशासन ही आधारभूत इकाई होती है — जनता की शिकायतें जिला स्तर पर अधिक उभरती हैं
- राज्य विधानसभाओं के अधिकांश सदस्य जिले से ही निर्वाचित होते हैं — जिला राज्य प्रशासन की ऐसी इकाई होती है जहाँ न केवल सरकारी नीतियों को ही क्रियान्वित किया जाता है बल्कि इनका नीति-निर्माताओं के चयन में भी निर्णायक प्रभाव रहता है
- दैनिक जीवन में साधारण नागरिकों का संपर्क सीधा राज्य अथवा केंद्र से या उसके प्रशासन से न होकर प्रत्यक्ष रूप से जिला प्रशासन से होता है
- शासन-प्रबंध की दृष्टि से और विकास योजनाओं के निर्माण एवं उनको क्रियान्वित करने की दृष्टि से जिला प्रशासन बड़ा उपयोगी सिद्ध होता है
जिला प्रशासन के मुख्य उद्देश्य
- (क) सरकारी कानूनों और आदेशों को अपने क्षेत्र में लागू करना
- (ख) सरकार का भू-राजस्व एकत्र करना
- (ग) जिले की जनता का अधिकाधिक कल्याण